मेरे पुरुष मित्रों के नाम

मेरी सहेलियां ही बेहतर है तुमसे । अच्छी लगती है बातें तुम्हारी एक अलग दिशा एक नज़रिया नया । लेकिन सुन लेते हो तुम न जाने क्या उन लफ़्ज़ों के बीच, कुछ है ही नहीं जहां ये कसरत करते रहना पड़ता है तुम्हारे साथ मुझे हमेशा कि कहीं तुम कोई मतलब ना निकाल लो मेरी बातों, हँसी... Continue Reading →

WordPress.com.

Up ↑