बाप रे बाप …२१

पप्पा को भोपाल में खबर मिली, कि नाना बहुत बीमार हैं। पप्पा तुरंत ग्वालियर भागे। नाना के घर पहुँचे तो उन्हें काफी गंभीर अवस्था में पाया। एक मित्र को डॉक्टर बुलाने के लिए कहा। वो कुछ ही देर में मेडिकल कॉलेज के किसी प्रोफेसर को साथ ले कर आया। उन्होंने जाँच कर तुरंत अस्पताल में... Continue Reading →

बाप रे बाप… २०

पप्पा की नौकरी फिर शुरू हो गई। जब कभी ग्वालियर जाते, बाडे पर नाना से मुलाकात हो जाती। पिता पुत्र इधर उधर की बातें करते। देवानंद की नई फिल्मों की चर्चा होती, चाय पीते और अपने अपने घर लौट जाते। परिस्थितियों की वजह से पप्पा में इतना अधिक आत्मविश्वास आ गया था कि वे किसी... Continue Reading →

बाप रे बाप…१९

पप्पा को गाड़ियों का बड़ा शौक था। स्कूटर और कार तो आमतौर पर सभी लेते हैं, लेकिन हमारे पप्पा ने तो रिक्शा से लेकर बस तक, सभी प्रकार की गाड़ियाँ जीवन में कभी ना कभी खरीदीं। लायसेंस तो उनके पास स्कूटर से ले कर ट्रक तक हर प्रकार की गाड़ी चलाने का था। उस जमाने... Continue Reading →

बाप रे बाप…१८

  भाटिया अंकल और पप्पा की बड़ी गहरी दोस्ती थी। दोनों हमेशा साथ-साथ ही रहते थे। भाटिया अंकल का परिवार मुंबई में था। एक बार दोनों ने तय किया कि मुंबई जा कर देवानंद से मिला कर आएँ। मंगाराम बिस्किट कंपनी की फॅक्ट्री ग्वालियर में थी। उसका मालिक इनका दोस्त था। उसका एक ट्रक बिस्किट... Continue Reading →

बाप रे बाप…१७

पप्पा को ट्रक में सवारी करने का मानो चस्का लग गया था। उनका कहना है कि ट्रक में बैठ कर, हायवे पर, रात को सफर करने का रोमांच वही समझ सकते हैं, जिन्होंने कभी ट्रक में सामने बैठ कर सफर किया है। जिस तरह उनका ट्रक का सफर बंद नहीं हुआ, उसी तरह उनके जीवन... Continue Reading →

बाप रे बाप …१६

पप्पा बहुत अपघात प्रवण (accident prone) हैं। खुद ही जा कर अपघातों से टकरा जाते हैं। इतने अधिक जानलेवा हादसे उनके साथ हुए हैं, कि मेरा बेटा नील कहता है “मैं तो कई बार मरा होता इतने में।” पहले मैनें सोचा था कि जैसे-जैसे उनकी जीवन कहानी में कोई घटना आएगी, तब उसके बारे में... Continue Reading →

बाप रे बाप… १५

पप्पा हमेशा से ही अति उत्साही हैं। आलस का तो उनमें कहीं नामोंनिशान नहीं है। हर समय कुछ ना कुछ करते ही रहते हैं। यदि उन्हें किसी बात की सज़ा देनी हो, तो सबसे बढ़िया तरीका ये हो सकता है कि उन्हें घर में एक जगह बैठा कर रखा जाए। हमारे घर पुणे आते, तो... Continue Reading →

बाप रे बाप…१४

बीए में प्रवेश लेते समय सबसे बड़ी समस्या यह थी, कि विषय क्या लिया जाए। जैसे तैसे इंटर पास हो गये थे, लेकिन इस बात का एहसास था ,कि उन्हें एक भी विषय ठीक से नहीं आता। गणित से तो हमेशा की दुश्मनी थी। नौकरी के साथ साथ विज्ञान असंभव था। इंटर में कॉमर्स का... Continue Reading →

बाप रे बाप…१३

बालकृष्ण निर्वीकर पप्पा के बहुत बचपन के मित्र थे। उनके पिता का देहांत उनके बचपन में ही हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद पप्पा की माँ ने काका की माँ को घर चलाने में बहुत मदद की थी। जब तक जीवित रहीं, वे किसी न किसी प्रकार से उनकी सहायता करती रहती थीं। माँ... Continue Reading →

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