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इंद्रधनुष

अगली बार जो बरसे बारिश बंद आँखे कर लेना और सुनना टप टप झरती बूंदों की  वो आवाज .. जो अलग है नल से टपकते पानी की आवाज से, जो अलग है गीली पलकों से ढलकती बूंदों के अंदाज़ से, जो अलग है समुंदर की गरजती लहरों के गाज से, जो अलग है बहते झरने ... Continue Reading →

मुझे सब याद है ना!

तुम मेरा नाम भी अक्सर इन दिनों भूल जाती हो। वो सब कुछ जो तुम्हारी जिंदगी था,और जो तुमको तुम बनाता था वो जज़्बा,जो तुम्हारी शख्सियत था,अब वो ना जाने कहाँ गुम है! भले खोई हुई सी ही सही मगर ये अब भी तुम ही हो। तुम्हारा ही लहू है, दौड़ता जो मेरी रग रग... Continue Reading →

तीस साल बाद..

झरने की तरह उसके लब से यूं लफ़्ज़ धबाधब झरते हैं। उसके अल्फाज़ों के रेले मन को आंदोलित करते हैं। जाने कैसे इतनी जल्दी वो इतना सब सोच भी लेता है उसके एहसासों का  बादल शब्दों को खोज भी लेता है उसकी बातें हैं आग कभी उसकी बातें हैं पानी भी अक्सर तो तीर सी... Continue Reading →

शून्य शिखर पर

देवभूमी में बिन्सर के जंगल के किसी छोर पर, चलते चलते ज़ीरो पॉइंट की ओर , कुछ पल सचमुच मानो शून्य में ही थे। ना आगे कोई ,न पीछे ही। ज़माना नहीं एहसास ए ज़माना भी नहीं। मैने कल्पना की कि अगले मोड़ पर मुड़ कर मैं भी निकल गई हूं  दूर कहीं। मैने खुद... Continue Reading →

कुछ नया…

कर्नाटक में दांडेली के खूबसूरत जंगल में एक शानदार पेड़ के सामने कदम रुक गये। कितनी तस्वीरें खींची लेकिन उस पेड़ की विशालता और उस जंगल की भव्यता कॅमेरे में कैद होने को किसी सूरत में तैयार नहीं । बड़ी देर मोबाईल पर खींची तस्वीर को देखती रही। और उस समय जो विचार मन में... Continue Reading →

सन-सेट क्लब

कितने मज़े मज़े में कट रहीं हैं मेरी रातें चुगलियाँ सूरज की है और चाँद से है बाते बरसात बेतकल्लुफी से जम के बैठ गई है दहलीज़ पर बहार ठिठक गई है आते आते। अंधेरों की सोहबतों में तारों की कहानियाँ। गुजरे हुए लम्हों से मुख़्तसर सी मुलाकातें। पंछियों की बातें, गिलहरियों से गुफ्तगू यूँ... Continue Reading →

तट पर भी हैं तूफान बहुत

जब रुकना होगा सोचेंगे इंतजार में हैं अरमान बहुत। है अभी तो कश्ती लहरों पर है हम में अब भी जान बहुत। भंवरों से हम कब डरा किए उलझाता है इत्मीनान बहुत। तुम साहिल का नाम ना लो तट पर भी हैं तूफान बहुत। है कार-ए-जहाँ दराज़ अभी ठुकराए हैं फरमान बहुत। ना खुदा, नाखुदा कोई... Continue Reading →

नकाब

पहले ही आसान नहीं था दुनियाँ के हालात समझना चेहरों पर चेहरे पहने लोगों के दिल की बात समझना। असली-नकली चेहरों का हम कर ना पाते थे हिसाब, और कयामत उस पर के अब पहन लिए सबने नकाब। देख हर इक चेहरा पहचाना, मुस्कुराने से मिली निजात लेकिन उलझन और बढ़ी है, समझ ना आए आधी बात।... Continue Reading →

सुनो…

कम बोलो, उसने कहा। ये भी क्या कि बेवजह  इतने शब्द खर्च किए जाओ  जैसे मुफ्त का माल हों। किसी दिन मौन भी रहो कुछ भी,बिल्कुल कुछ भी ना कहो। आखिर साढे तीन सौ शब्दों का  एक दिन भर का कोटा तय हुआ। फिर हूँ या हाँ को एक शब्द माना जाए , या नहीं, इस पर... Continue Reading →

लगभग ईश्वर की तरह

लगभग ईश्वर की तरह ही लगा उसे जब उसने अपने भरे-पूरे  संसार पर नज़र डाली। बड़ा सृजनशील रहा जीवन। कुछ नहीं से शुरू कर  क्या नहीं तक.... अब तो उसकी रचनाएंँ भी अपनी  खुद की सृष्टि के निर्माण में लगी हैं। उसके इस सारे स्व कर्तृत्व से स्वनिर्मित विश्व के बीच लगभग ईश्वर की ही तरह लगा... Continue Reading →

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